प्रेम जरा हट के
बात ज्यादा पुरानी भी नही है। अपन मस्त जी रहे थे, एकदम आइडियल लाइफ जो कोई लौंडा केवल सोच ही सकता है। पैसे, समय और कोई ज़िम्मेदारी नहीं। दिसम्बर का महीना था, पापा के एक दोस्त दूसरे शहर से हमारे यहां आने वाले थे अपने बच्चों के साथ। मैं काफी छोटा था जब उनसे मिला था, बस धुंधला याद था।
खैर, अब मुझे आदेश जारी हुआ, अगले कुछ दिन मुझे घर पर देने हैं और राजू गाइड का काम करना है। अब अपन श्रवण कुमार, चले गए एयरपोर्ट अंकल ऑन्टी और बच्चों को लेने एकदम बेमन से। पहुंचे, गाड़ी पार्क की और गेट ओर प्रतीक्षा करने लगें, फ्लाइट भी आ चुकी थी लेकिन पार्टी का कोई पता नहीं!
खैर मुझे फ़ोन आया, और एक मधुर ध्वनि कानों में पड़ी। ना हाई न हेलो, आप कहाँ हैं? मैंने पूछा जी आप कौन? मैं रति, रति कौन? जी शुक्ला अंकल की बेटी! ओह, मैंने कहा। फिर कॉर्डिनेट कर हम एक जगह सब मिले। घर वाले बताना भूल गए थे, की बच्चे नहीं वयस्क हैं!
जैसे ही मेरी नज़र तब रति पर गयी,और बस, सही समझे, पिघल गया। खैर, पैर छुए अंकल आंटी के और गाड़ी में समान लाद एक मुस्कुराहट के साथ घर लौट आया। रति अपने नाम अनुरूप बहुत सुंदर है, सुदर्शन व्यक्तित्व, मोहक आवाज़,मादक मुस्कान इत्यादि। basically everything a guy can dream of in a girl.
घर आये, रति, और रश्मि, छोटी बहन उसकी, जो तब करीब 20 की रही होगी (बच्चे🙄), उन्हें मेरे सामने वाला कमरा दिया गया और अंकल और आंटी को मेरे पेरेंट्स वाले फ्लोर पर अलॉटमेंट मिला। अब बस, मैं लगभग एकदम काम छोड़ सेवा में लग गया।
रति और मैं, साथ समय बिताने लगे। कहीं घूमने भी निकलते, पूरा परिवार अलग, मैं और रति अलग। ढेर सारी बातें, ऑकशनल टचिंग, आग उधर भी लग रही थी। एक किस्सा जुहू बीच का है( अनिवार्य जगह है मुम्बई दर्शन की और चाट पकौड़ी की, डोंट @ मी)। सब अलग, और हमेशा की तरह मैं और रति अलग।
एक पल रेत पर नंगे पांव चल रहे हैं, और दूसरे पल हाथ कब पकड़ के चलने लगे पता ही नही चला। रोमांस का रोमांच भी अजब होता है, आज भी याद करता हूँ तो सिरहन होती है। बस चलते गए, समय का अंदाज़ा भी नही लगा और अंधेरा हो गया। घर वालों को भी तब याद आयी और फ़ोन आने लगे कि आ जाओ कहा पी लो कुछ।
मां सब समझ रही थी शायद, और उन्हें रति पसन्द भी थी, इसलिए अकेले छोड़ा गया(ऐसा मुझे लगता है)। हम वापस आये उस दिन, रति और रश्मि मेरे कमरे में आ गयी और टोरेंट एंड चिल (तब नेटफ्लिक्स भारत नही आया था)। मेरी बेड पर ही तीनो बैठ के मूवी देख रहे थे, रति का हाथ मेरे हाथ पर था।
एक बढ़िया फीलिंग थी वह, हैप्पी विथ बटरफ्लाई इन योर स्टमक! शायद रश्मि को ये बात खटक गयी और कमीनी बीच में आ गयी😡। अगली शाम केवल मैं और रति कार्टर रोड गए बाइक राइड पे और Out of the blues में डिनर कर, समुद्र किनारे(on the promenade) हाथ पकड़ घंटों बैठे रहे बस खोये रहे एक दूसरे में।
क्या हो रहा है, क्या आगे होगा, हमने कोई बात नही की इस बारे में। बस उस पल में थे। हमारी बातें भी साधारण ही थी, एक दूसरे की तारीफ, किस्से बातें इधर उधर की। लेकिन यहां बातों से ज्यादा कंडक्ट अहम था। उसका मुझे देखने का अंदाज़, हल्का सा शर्माना मुझे हमेशा याद रहेगा।
अगला दिन था 31 दिसम्बर। घर पर बाहर जाने की अनुमति मिली नही, बोले सबके साथ में ही मनाओ(मैं तो रश्मि को भी साथ ले जाने तैयार था) खैर, I had to make best of the situation.अब म्यूजिक चला दिया थोड़े लोग और भी आये थे, नाच गाना हुआ। 11:45 पर मैंने रति को बोला, चलो, थोड़ा पूल पर चलते हैं
कोई सोच नही थी क्या करना है, बस उसके साथ अकेले वो पल बिताना है, यही था शायद दिमाग में। मुम्बई में ठंड नही पड़ती, पर 18 डिग्री के आसपास था तापमान, वहां भी बस केवल बैठ के मुद्दे की बात छोड़ इधर उधर की बात ही करने लगा मैं, और वो उतने ध्यान से सुन भी रही थी।
12 बज गए। हम एक दूसरे से गले मिले, और एकाएक, अचानक, उसने मुझे किस कर दिया!लग गए 440 वाल्ट! बस जीवन में क्लैरिटी आ गयी की बस वही चाहिए फॉरएवर एंड आफ्टर। वह पल अब भी मुझमें जीवित है। समय याद नही, लेकिन कुछ देर बाद रश्मि नाम की हड्डी आ गयी और एक यादगार शाम, खत्म हुई।
अगला दिन, यानी जनवरी 1, रवानगी का था।शाम की फ्लाइट थी, तो सुबह से बहाना बना के एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा रहने कोशिश की हम दोनों ने। अब सबके सामने प्रणय प्रदर्शन तो हो नही सकता था, फिर भी पल पकड़ने की ट्राय तो मारी गयी। खुश थे हम दोनों।
शाम हुई, एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए, अरिजीत के रोमांटिक गाने बजाते हुए। पहुँच के टाटा बाई बाई हुआ, और हल्का सा कस्टमरी हग और बस, वो चले गए। मुझे अचानक से एक धक्का सा लगा, उनके एयरपोर्ट गेट में घुसते ही, लगा कि कुछ कहना चाहिए था मुझे इतने दिनों में।
खैर घर आया, और उसने भी लैंड हो कर फोन कर दिया और सबसे जरूरी बात "मिसिंग यू" कह दी। मैं दिन रात बस उन पलों के बारे में सोचता और उसके शहर जाने की प्लानिंग बनाता। तब वह अपना mba खत्म कर ही रही थी, तो उसने मुझे बोला, थोड़ा रुक जाओ एक बात ये हो जाए, तो आ जाना..
दिन हफ्ते, हफ्ते महीने कब बन गए पता ही नही चला। हमारी बातें भी उतनी निरंतर अब नही होती थी, उसकी व्यस्तता के कारण शायद।फिर एकदम से बात बन्द। मैंने फोन तो किया, पर अनुत्तरित ही रहा। भावनाएं अब भी थीं, लेकिन ईगो ने अब टेकओवर कर लिया था।
करीब 2 महीने बाद, उसका मैसेज आया, हेलो? कहाँ हो बिजी? मैं काफी देर तक देखता रहा कि क्या करूँ क्या लिखूं? दिल कह रहा था भाई बात कर लो, कोई मजबूरी रही होगी, दिमाग बोले कोई जरूरत नही है, थोड़ा भाव खाओ। अंत मैं, बिल्कुल सही समझे, दिल जीत गया, और हमने लिख मारा, बस यहीं हैं, अपना सुनाओ
बस परीक्षाओं में व्यस्त थी, कहीं बात नही ही पाई। अब फ्री, अब कहीं नही जाऊंगी। बातें अब फिर शुरू हुई, दिल ने फिर तख्तापलट कर दिया और मिलने के प्लान फिर बनने लगे। एक बात कहूंगा, इस वशीकरण का कोई इलाज नही है, या तो आप का बन जायेगा, या बहुत बड़ा वाला कटेगा, कोई मिडल ग्राउंड नही है।
हमने मिलकर सोचा, की एक दूसरे के शहर आने से बेहतर है कहीं चला जाये। गोआ पर सहमति बनी और बुकिंग कर दी गयी। अब तक कोई प्रणय निवेदन, जीने मरने की कसमें नहीं खाई गयीं थी, न ही कोई चर्चा हुई थी। मैने सोचा कि गोआ बढ़िया मौका होगा प्रणय निवेदन का। उसने भी अपनी तरफ से कोई पहल नही की थी।
गोआ जाने से एक दिन पहले, वो बीमार पड़ गयी, इतनी की अस्पताल भर्ती करना पड़ा। उस दिन थोड़ी बहस हुई, जब उसने मुझे बताया कि बीमार है, तो मुझे लगा कि हुआ होगा हल्का फुल्का कुछ। मैं उसकी सेहत से ज्यादा ट्रिप पर फोकस्ड था। खैर 3 दिन बाद घर आई वह वापस, और फिर हम लड़े और फिर बातें बन्द!
अब का गैप पिछले से लम्बा था। 6 महीने बाद मैंने ही कॉल कर दी उसको, क्षमा याचना की, और सिलसिला फिर शुरू। काफी कुछ था, उसकी नई नौकरी, नए दोस्त, और एक खास दोस्त! मुझे काटो तो खून नहीं। मैने मिलने की बात की, उसने मुम्बई आने का प्लान बनाया, और आ गयी। सोचा, इस बार बात करूँगा।
एयरपोर्ट गया था लेने, सोचा था, देखते ही गले लग जाएंगे, लेकिन निराश हुआ एक कैसुअल हग से! मतलब वही फीलिंग के आपने 1 करोड़ की लॉटरी जीती है लेकिन 80% टैक्स के कट जाएंगे। लेकिन अपन लगन के पक्के आदमी हैं, छोटी मोटी निराशा कुछ नही उखाड़ सकती।
वहीं से सीधे डिनर करने चले गए। उसे पावभाजी बहुत पसंद है, वही शिवसागर ले गया। वही नॉर्मल बातें, अब मैं बातों को डिकोड करने की कोशश करने लगा उस एयरपोर्ट वाले हग के बाद से। क्या अब भी कोई चिंगारी बची है? क्या अब बोलना सही होगा? ऐसे कई प्रश्न दिमाग में। मैं सहज नही महसूस कर रहा था।
आये वापस घर मैंने सोचा थोड़ी सी वाक लेंगे साथ, लेकि वह अपने कमरे में सोने चली गयी। और अपन भी चादर से मुंह ढक लिए। 2 दिन और भी थे अपने पास। लेकिन कहानी सीमित रखनी है, तो कुछ नही हुआ इन दो दिनों में,गाइड ही बना रहा और वह वापस चली गयी।
वैसे मैं हिम्मती लड़का हूँ। 40 शांतिप्रिय लोगो की भीड़ में अकेले खड़ा रह कर एक को थप्पड़ लगा चुका हूँ, लेकिन साला यहां अपनी हिम्मत नही हुई मन की बात कहने की। फिर कुछ समय बीता फ़ोन पर लेकिन उसकी नौकरी की वजह से मिलने का प्लान नही बन पा रहा था। हज़ार बार सोचा की पहुंच जाऊं लेकिन नहीं गया। क्या पता ओवर न हो जाये? आप जितना ज्यादा सोचते हो, रायता उतना ही फैलता है, जो कि यहां हो रहा था।
एक दिन उसने बताया कि उसकी एक दोस्त मुम्बई शिफ्ट हुई है, किसी को जानती नही, आप मिल लेना उससे। अब उसने कहा है तो मानना तो पड़ेगा ही! अपन स्कोप के चक्कर में थे।
प्रिया, उसकी दोस्त, हम मिले एक कॉफी हाउस में। अच्छी बातें हुईं, कॉफी शॉप से मूवी थिएटर कब आगये पता ही नही चला। मूवी के बाद, मैं घर छोड़ने गया प्रिया को, और we kissed in the car कोई इंटेंशन नही था, बस हो गया। घर वापस पहुंचा तो रति का फोन आया। बहुत गुस्से में थी, बोली how dare you!... और भी काफी कुछ। प्रिया ने रति को बता दिया जो भी हुआ था। मेरे में मिक्स इमोशन थे, उसकी जलन और गुस्से से खुशी, और बिना चीटिंग किये चीटिंग वाली गिल्ट। उसने फ़ोन पटक दिया कह के अब कभी बात नही करेगी। मैंने पलट के मिलाया तो उठाया नही।
मैंने अगले दिन उसके शहर की फ्लाइट ले ली, सोचा मिल के मना लूंगा, मैं 2 दिन था वहां, लेकिन वह नही मिली। मैं होटल के कमरे से बाहर तक नही निकला। वापस मुम्बई आ गया किस्मत को कोसते। मेरी फीलिंग और बढ़ चुकी थी। 2 महीने बाद, मैंने फिर कोशिश की, और इस बार बात बन गयी।
उसने शर्ते रखीं, फिर कभी प्रिया से नही मिलूंगा, उसके मेसेज का रिप्लाई नही करूँगा इत्यादि। अगले हफ्ते वह फिर मुम्बई आयी। इस बार ऑफिस के काम से। हम डिनर के लिए मिले, फिर उसे मैने उसके होटल छोड़ दिया। पर इस बार मैंने सोच रखा था, चाहे जो हो जाये, दिल की बात होगी।
मैं काफी पोसिटिव भी था, प्रिया वाले कांड के बाद से, की जलन है तो मोहब्बत भी होगी। अगले दिन शाम को, मैंने मूवी और डिनर का प्लान बनाया। एक बढ़िया जगह गए हम। ड्रिंक्स आर्डर की, और मैंने बोल दिया। I am just trying to say something from long, so hear me out. All these times, I wanted to say this. I had planned it several times, to make a show out of it, but they failed every time. I am keeping it simple, Rati, I am in love with you. बस कह दिया। थोड़ी देर तक रति मुझे देखती रही, और फिर बोली, मैं किसी के साथ हूं..
मेरे अंदर ज्वालामुखी फटने लगे, एक पल में सब बदल गया। मैंने फिर भी संयम रखा, और फिर एक "दोस्त" की तरह लड़के के बारे में पूछा। डिनर खत्म हुआ। अगले दो दिन हम फिर मिले। मैं पूरी तरह से अपने इमोशन्स को कंट्रोल में रखे हुए था, अपने आप को प्यार में कटवाए आशिक की तरह नही दिखाना चाहता था।
मेरे लिए सबकुछ बदल गया था। पर वह अब भी जैसे कुछ नही हुआ हो, वैसा व्यवहार कर रही थी। किसी भी लड़के की तरह मेरे मन में भी कई टीनएजर वाले खलनायकी विचार आये, के लड़के को पिटवा दो इत्यादि। पर खैर लाइफ है,चलती रहती है।
एक दिन अचानक, रति का मुझे फ़ोन आया, उसे मिलना था। भले ही उसे नही है, अपने को तो प्यार था ही। चले गए मिलने उसके शहर। हम एक कॉफी शॉप में मिले। बोली, रवि शादी करना चाहता है, कर लो, मैन कहा। फिर जो उसने कहा उसने मुझे हिला दिया।
उसने कहा, I have feelings for you..But I have feelings for him too. I am very confused. और भी कई बातें। मैने दो घंटे पूरे बैठ कर शांति से उसकी पूरी बात सुनी। पर मेरे दिमाग में वो 3 साल घूम रहे रहे, जितने समय मैं इसके पीछे पगलाया था। एक एक पल। वह हाथ पकड़ के चलना, वह लड़ना सब।
दो घंटे बाद, मैंने बिल मंगाया। बोला फ्लाइट का टाइम हो रहा है, चलना चाहिए। कुछ कहोगे नहीं तुम? मैं बहुत प्यार करता हूँ तुमसे, पर तुम्हारे जीवन में ऑप्शन नही होना चाहता, बस इतना कहूंगा। मैं वापस मुम्बई आ गया। अच्छी यादें अब भी सहेजी हैं, बुरी भूला चुका हूं।
किसी से कुछ कहना है? मत सोचिये, कह दीजिये। जितना सोचेंगे, रायता उतना फैलेगा। दिल की बातें दिल में रखने के लिए नही होतीं है, मुह से बोलने की होती हैं। ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? मन और दिल नही मिलेगा? कम से कम जीवन तो चलता रहेगा!
बहुत सारे वृतांत, किस्से इसमें नही लिख पाया। बहुत लंबी गाथा हो जाती। अब @saket71 @Shrimaan जी की तरह कथाकार भी नहीं हूं जो कम शब्दों में ज्यादा कह सकते हैं। तो क्षमाप्रार्थी अभी से
खैर, अब मुझे आदेश जारी हुआ, अगले कुछ दिन मुझे घर पर देने हैं और राजू गाइड का काम करना है। अब अपन श्रवण कुमार, चले गए एयरपोर्ट अंकल ऑन्टी और बच्चों को लेने एकदम बेमन से। पहुंचे, गाड़ी पार्क की और गेट ओर प्रतीक्षा करने लगें, फ्लाइट भी आ चुकी थी लेकिन पार्टी का कोई पता नहीं!
खैर मुझे फ़ोन आया, और एक मधुर ध्वनि कानों में पड़ी। ना हाई न हेलो, आप कहाँ हैं? मैंने पूछा जी आप कौन? मैं रति, रति कौन? जी शुक्ला अंकल की बेटी! ओह, मैंने कहा। फिर कॉर्डिनेट कर हम एक जगह सब मिले। घर वाले बताना भूल गए थे, की बच्चे नहीं वयस्क हैं!
जैसे ही मेरी नज़र तब रति पर गयी,और बस, सही समझे, पिघल गया। खैर, पैर छुए अंकल आंटी के और गाड़ी में समान लाद एक मुस्कुराहट के साथ घर लौट आया। रति अपने नाम अनुरूप बहुत सुंदर है, सुदर्शन व्यक्तित्व, मोहक आवाज़,मादक मुस्कान इत्यादि। basically everything a guy can dream of in a girl.
घर आये, रति, और रश्मि, छोटी बहन उसकी, जो तब करीब 20 की रही होगी (बच्चे🙄), उन्हें मेरे सामने वाला कमरा दिया गया और अंकल और आंटी को मेरे पेरेंट्स वाले फ्लोर पर अलॉटमेंट मिला। अब बस, मैं लगभग एकदम काम छोड़ सेवा में लग गया।
रति और मैं, साथ समय बिताने लगे। कहीं घूमने भी निकलते, पूरा परिवार अलग, मैं और रति अलग। ढेर सारी बातें, ऑकशनल टचिंग, आग उधर भी लग रही थी। एक किस्सा जुहू बीच का है( अनिवार्य जगह है मुम्बई दर्शन की और चाट पकौड़ी की, डोंट @ मी)। सब अलग, और हमेशा की तरह मैं और रति अलग।
एक पल रेत पर नंगे पांव चल रहे हैं, और दूसरे पल हाथ कब पकड़ के चलने लगे पता ही नही चला। रोमांस का रोमांच भी अजब होता है, आज भी याद करता हूँ तो सिरहन होती है। बस चलते गए, समय का अंदाज़ा भी नही लगा और अंधेरा हो गया। घर वालों को भी तब याद आयी और फ़ोन आने लगे कि आ जाओ कहा पी लो कुछ।
मां सब समझ रही थी शायद, और उन्हें रति पसन्द भी थी, इसलिए अकेले छोड़ा गया(ऐसा मुझे लगता है)। हम वापस आये उस दिन, रति और रश्मि मेरे कमरे में आ गयी और टोरेंट एंड चिल (तब नेटफ्लिक्स भारत नही आया था)। मेरी बेड पर ही तीनो बैठ के मूवी देख रहे थे, रति का हाथ मेरे हाथ पर था।
एक बढ़िया फीलिंग थी वह, हैप्पी विथ बटरफ्लाई इन योर स्टमक! शायद रश्मि को ये बात खटक गयी और कमीनी बीच में आ गयी😡। अगली शाम केवल मैं और रति कार्टर रोड गए बाइक राइड पे और Out of the blues में डिनर कर, समुद्र किनारे(on the promenade) हाथ पकड़ घंटों बैठे रहे बस खोये रहे एक दूसरे में।
क्या हो रहा है, क्या आगे होगा, हमने कोई बात नही की इस बारे में। बस उस पल में थे। हमारी बातें भी साधारण ही थी, एक दूसरे की तारीफ, किस्से बातें इधर उधर की। लेकिन यहां बातों से ज्यादा कंडक्ट अहम था। उसका मुझे देखने का अंदाज़, हल्का सा शर्माना मुझे हमेशा याद रहेगा।
अगला दिन था 31 दिसम्बर। घर पर बाहर जाने की अनुमति मिली नही, बोले सबके साथ में ही मनाओ(मैं तो रश्मि को भी साथ ले जाने तैयार था) खैर, I had to make best of the situation.अब म्यूजिक चला दिया थोड़े लोग और भी आये थे, नाच गाना हुआ। 11:45 पर मैंने रति को बोला, चलो, थोड़ा पूल पर चलते हैं
कोई सोच नही थी क्या करना है, बस उसके साथ अकेले वो पल बिताना है, यही था शायद दिमाग में। मुम्बई में ठंड नही पड़ती, पर 18 डिग्री के आसपास था तापमान, वहां भी बस केवल बैठ के मुद्दे की बात छोड़ इधर उधर की बात ही करने लगा मैं, और वो उतने ध्यान से सुन भी रही थी।
12 बज गए। हम एक दूसरे से गले मिले, और एकाएक, अचानक, उसने मुझे किस कर दिया!लग गए 440 वाल्ट! बस जीवन में क्लैरिटी आ गयी की बस वही चाहिए फॉरएवर एंड आफ्टर। वह पल अब भी मुझमें जीवित है। समय याद नही, लेकिन कुछ देर बाद रश्मि नाम की हड्डी आ गयी और एक यादगार शाम, खत्म हुई।
अगला दिन, यानी जनवरी 1, रवानगी का था।शाम की फ्लाइट थी, तो सुबह से बहाना बना के एक दूसरे के साथ ज्यादा से ज्यादा रहने कोशिश की हम दोनों ने। अब सबके सामने प्रणय प्रदर्शन तो हो नही सकता था, फिर भी पल पकड़ने की ट्राय तो मारी गयी। खुश थे हम दोनों।
शाम हुई, एयरपोर्ट के लिए रवाना हुए, अरिजीत के रोमांटिक गाने बजाते हुए। पहुँच के टाटा बाई बाई हुआ, और हल्का सा कस्टमरी हग और बस, वो चले गए। मुझे अचानक से एक धक्का सा लगा, उनके एयरपोर्ट गेट में घुसते ही, लगा कि कुछ कहना चाहिए था मुझे इतने दिनों में।
खैर घर आया, और उसने भी लैंड हो कर फोन कर दिया और सबसे जरूरी बात "मिसिंग यू" कह दी। मैं दिन रात बस उन पलों के बारे में सोचता और उसके शहर जाने की प्लानिंग बनाता। तब वह अपना mba खत्म कर ही रही थी, तो उसने मुझे बोला, थोड़ा रुक जाओ एक बात ये हो जाए, तो आ जाना..
दिन हफ्ते, हफ्ते महीने कब बन गए पता ही नही चला। हमारी बातें भी उतनी निरंतर अब नही होती थी, उसकी व्यस्तता के कारण शायद।फिर एकदम से बात बन्द। मैंने फोन तो किया, पर अनुत्तरित ही रहा। भावनाएं अब भी थीं, लेकिन ईगो ने अब टेकओवर कर लिया था।
करीब 2 महीने बाद, उसका मैसेज आया, हेलो? कहाँ हो बिजी? मैं काफी देर तक देखता रहा कि क्या करूँ क्या लिखूं? दिल कह रहा था भाई बात कर लो, कोई मजबूरी रही होगी, दिमाग बोले कोई जरूरत नही है, थोड़ा भाव खाओ। अंत मैं, बिल्कुल सही समझे, दिल जीत गया, और हमने लिख मारा, बस यहीं हैं, अपना सुनाओ
बस परीक्षाओं में व्यस्त थी, कहीं बात नही ही पाई। अब फ्री, अब कहीं नही जाऊंगी। बातें अब फिर शुरू हुई, दिल ने फिर तख्तापलट कर दिया और मिलने के प्लान फिर बनने लगे। एक बात कहूंगा, इस वशीकरण का कोई इलाज नही है, या तो आप का बन जायेगा, या बहुत बड़ा वाला कटेगा, कोई मिडल ग्राउंड नही है।
हमने मिलकर सोचा, की एक दूसरे के शहर आने से बेहतर है कहीं चला जाये। गोआ पर सहमति बनी और बुकिंग कर दी गयी। अब तक कोई प्रणय निवेदन, जीने मरने की कसमें नहीं खाई गयीं थी, न ही कोई चर्चा हुई थी। मैने सोचा कि गोआ बढ़िया मौका होगा प्रणय निवेदन का। उसने भी अपनी तरफ से कोई पहल नही की थी।
गोआ जाने से एक दिन पहले, वो बीमार पड़ गयी, इतनी की अस्पताल भर्ती करना पड़ा। उस दिन थोड़ी बहस हुई, जब उसने मुझे बताया कि बीमार है, तो मुझे लगा कि हुआ होगा हल्का फुल्का कुछ। मैं उसकी सेहत से ज्यादा ट्रिप पर फोकस्ड था। खैर 3 दिन बाद घर आई वह वापस, और फिर हम लड़े और फिर बातें बन्द!
अब का गैप पिछले से लम्बा था। 6 महीने बाद मैंने ही कॉल कर दी उसको, क्षमा याचना की, और सिलसिला फिर शुरू। काफी कुछ था, उसकी नई नौकरी, नए दोस्त, और एक खास दोस्त! मुझे काटो तो खून नहीं। मैने मिलने की बात की, उसने मुम्बई आने का प्लान बनाया, और आ गयी। सोचा, इस बार बात करूँगा।
एयरपोर्ट गया था लेने, सोचा था, देखते ही गले लग जाएंगे, लेकिन निराश हुआ एक कैसुअल हग से! मतलब वही फीलिंग के आपने 1 करोड़ की लॉटरी जीती है लेकिन 80% टैक्स के कट जाएंगे। लेकिन अपन लगन के पक्के आदमी हैं, छोटी मोटी निराशा कुछ नही उखाड़ सकती।
वहीं से सीधे डिनर करने चले गए। उसे पावभाजी बहुत पसंद है, वही शिवसागर ले गया। वही नॉर्मल बातें, अब मैं बातों को डिकोड करने की कोशश करने लगा उस एयरपोर्ट वाले हग के बाद से। क्या अब भी कोई चिंगारी बची है? क्या अब बोलना सही होगा? ऐसे कई प्रश्न दिमाग में। मैं सहज नही महसूस कर रहा था।
आये वापस घर मैंने सोचा थोड़ी सी वाक लेंगे साथ, लेकि वह अपने कमरे में सोने चली गयी। और अपन भी चादर से मुंह ढक लिए। 2 दिन और भी थे अपने पास। लेकिन कहानी सीमित रखनी है, तो कुछ नही हुआ इन दो दिनों में,गाइड ही बना रहा और वह वापस चली गयी।
वैसे मैं हिम्मती लड़का हूँ। 40 शांतिप्रिय लोगो की भीड़ में अकेले खड़ा रह कर एक को थप्पड़ लगा चुका हूँ, लेकिन साला यहां अपनी हिम्मत नही हुई मन की बात कहने की। फिर कुछ समय बीता फ़ोन पर लेकिन उसकी नौकरी की वजह से मिलने का प्लान नही बन पा रहा था। हज़ार बार सोचा की पहुंच जाऊं लेकिन नहीं गया। क्या पता ओवर न हो जाये? आप जितना ज्यादा सोचते हो, रायता उतना ही फैलता है, जो कि यहां हो रहा था।
एक दिन उसने बताया कि उसकी एक दोस्त मुम्बई शिफ्ट हुई है, किसी को जानती नही, आप मिल लेना उससे। अब उसने कहा है तो मानना तो पड़ेगा ही! अपन स्कोप के चक्कर में थे।
प्रिया, उसकी दोस्त, हम मिले एक कॉफी हाउस में। अच्छी बातें हुईं, कॉफी शॉप से मूवी थिएटर कब आगये पता ही नही चला। मूवी के बाद, मैं घर छोड़ने गया प्रिया को, और we kissed in the car कोई इंटेंशन नही था, बस हो गया। घर वापस पहुंचा तो रति का फोन आया। बहुत गुस्से में थी, बोली how dare you!... और भी काफी कुछ। प्रिया ने रति को बता दिया जो भी हुआ था। मेरे में मिक्स इमोशन थे, उसकी जलन और गुस्से से खुशी, और बिना चीटिंग किये चीटिंग वाली गिल्ट। उसने फ़ोन पटक दिया कह के अब कभी बात नही करेगी। मैंने पलट के मिलाया तो उठाया नही।
मैंने अगले दिन उसके शहर की फ्लाइट ले ली, सोचा मिल के मना लूंगा, मैं 2 दिन था वहां, लेकिन वह नही मिली। मैं होटल के कमरे से बाहर तक नही निकला। वापस मुम्बई आ गया किस्मत को कोसते। मेरी फीलिंग और बढ़ चुकी थी। 2 महीने बाद, मैंने फिर कोशिश की, और इस बार बात बन गयी।
उसने शर्ते रखीं, फिर कभी प्रिया से नही मिलूंगा, उसके मेसेज का रिप्लाई नही करूँगा इत्यादि। अगले हफ्ते वह फिर मुम्बई आयी। इस बार ऑफिस के काम से। हम डिनर के लिए मिले, फिर उसे मैने उसके होटल छोड़ दिया। पर इस बार मैंने सोच रखा था, चाहे जो हो जाये, दिल की बात होगी।
मैं काफी पोसिटिव भी था, प्रिया वाले कांड के बाद से, की जलन है तो मोहब्बत भी होगी। अगले दिन शाम को, मैंने मूवी और डिनर का प्लान बनाया। एक बढ़िया जगह गए हम। ड्रिंक्स आर्डर की, और मैंने बोल दिया। I am just trying to say something from long, so hear me out. All these times, I wanted to say this. I had planned it several times, to make a show out of it, but they failed every time. I am keeping it simple, Rati, I am in love with you. बस कह दिया। थोड़ी देर तक रति मुझे देखती रही, और फिर बोली, मैं किसी के साथ हूं..
मेरे अंदर ज्वालामुखी फटने लगे, एक पल में सब बदल गया। मैंने फिर भी संयम रखा, और फिर एक "दोस्त" की तरह लड़के के बारे में पूछा। डिनर खत्म हुआ। अगले दो दिन हम फिर मिले। मैं पूरी तरह से अपने इमोशन्स को कंट्रोल में रखे हुए था, अपने आप को प्यार में कटवाए आशिक की तरह नही दिखाना चाहता था।
मेरे लिए सबकुछ बदल गया था। पर वह अब भी जैसे कुछ नही हुआ हो, वैसा व्यवहार कर रही थी। किसी भी लड़के की तरह मेरे मन में भी कई टीनएजर वाले खलनायकी विचार आये, के लड़के को पिटवा दो इत्यादि। पर खैर लाइफ है,चलती रहती है।
एक दिन अचानक, रति का मुझे फ़ोन आया, उसे मिलना था। भले ही उसे नही है, अपने को तो प्यार था ही। चले गए मिलने उसके शहर। हम एक कॉफी शॉप में मिले। बोली, रवि शादी करना चाहता है, कर लो, मैन कहा। फिर जो उसने कहा उसने मुझे हिला दिया।
उसने कहा, I have feelings for you..But I have feelings for him too. I am very confused. और भी कई बातें। मैने दो घंटे पूरे बैठ कर शांति से उसकी पूरी बात सुनी। पर मेरे दिमाग में वो 3 साल घूम रहे रहे, जितने समय मैं इसके पीछे पगलाया था। एक एक पल। वह हाथ पकड़ के चलना, वह लड़ना सब।
दो घंटे बाद, मैंने बिल मंगाया। बोला फ्लाइट का टाइम हो रहा है, चलना चाहिए। कुछ कहोगे नहीं तुम? मैं बहुत प्यार करता हूँ तुमसे, पर तुम्हारे जीवन में ऑप्शन नही होना चाहता, बस इतना कहूंगा। मैं वापस मुम्बई आ गया। अच्छी यादें अब भी सहेजी हैं, बुरी भूला चुका हूं।
किसी से कुछ कहना है? मत सोचिये, कह दीजिये। जितना सोचेंगे, रायता उतना फैलेगा। दिल की बातें दिल में रखने के लिए नही होतीं है, मुह से बोलने की होती हैं। ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? मन और दिल नही मिलेगा? कम से कम जीवन तो चलता रहेगा!
बहुत सारे वृतांत, किस्से इसमें नही लिख पाया। बहुत लंबी गाथा हो जाती। अब @saket71 @Shrimaan जी की तरह कथाकार भी नहीं हूं जो कम शब्दों में ज्यादा कह सकते हैं। तो क्षमाप्रार्थी अभी से
How come Ravi is the villain of all your stories?
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