और में पियानो (कीबोर्ड) ले आया.

खाली बैठे आदमी के पास एक काम बहुत बढ़िया होता है. अतिशयोक्तिपूर्ण सोच. वह सोचता है की जगत में कोई भी काम कठिन नहीं है ( मानस ही पढ़ ले, लेकिन खाली है, कैसे पढ़ेगा ). तो बस अपन भी खाली बैठे थे एक दिन और मन में आ गया, अब हम पियानो बजायेंगे. सीखेंगे नहीं, बजायेंगे. बस ऑनलाइन दुकान पर आर्डर प्लेस कर पियानो आने की प्रतीक्षा करने लगे. संगीत से हमारे खानदान का दूर दूर तक लेना देना नहीं है. गायन के नाम पर केवल मानस पाठ होता है और आरती.  खैर अब पियानो आ गया. २ ४ आसान धुन जो बचपन में कभी खिलौने वाले पियानो पर बजाये थे उसको ३ ४ बार बजा के उस दिन को विराम दे दिया, सोचा मोजार्ट कल बनेंगे अब.

अब खाली आदमी की दशा देखिये, जब भी कोई फर्जी काज हाथ में लेता, तो नाना प्रकार के और फर्जी काज उसे याद आने लगते हैं. अगले दिन ऐसे ही किसी फर्जी काज में व्यस्त हो गया अगले दिन पर मोजार्ट को टाल कर.
फिर अगला दिन आया, फिर कोई फर्जी कार्य, फिर असली कार्य. होते करते हुआ ये की वह पियानो वैसे का वैसा वहीँ प्रतीक्षारत रह गया, और में उस कमरे में भी गिनती के १० बार गया. महीने साल हो गए और में भूल गया की ऐसी कोई वस्तु मेरे पास है भी.

फिर एक बार याद आ गयी, पर अब मन नहीं था, असली व्यस्तता के कारण. मन को समझाया की अब भांजी आने वाली है, वही बजाएगी, और मेरा पियानो खरीदना सफल हो जायेगा. ये बात अलग है भांजी ने देखा तक नहीं उस तरफ. अभी दिमाग में यही है की छोटी है, जब बड़ी हो जाएगी तब वादन होगा. 

वैसे ये पियानो वाली घटना जीवन की घटनाओ से कुछ अलग नहीं है. हम अनायास के सम्बन्ध बना लेते हैं, व्यक्तियों से, वस्तुओ से, और फिर बाकि का जीवन उनका औचित्य सिद्ध करने में लगा देते हैं. 
खासकर प्रसंग अगर प्रेम का हो तो. जरुरी नहीं है जो व्यक्ति पसंद हो वह आपका आगे साथ निभाए. हो सकता है आप ही उसका साथ न निभाएं. मैं यह नहीं कहता की जीवन का कोई भी निर्णय संबंधो के विषयो में बहुत सोच विचार कर करें, लेकिन कम से कम जहाँ मामला २ लोगों के साथ का हो, वहां चिंतन करना अति आवश्यक है. जरुरी नहीं है जो रिश्ते ख़राब हों उनमे हमेशा कटुता रहे, लेकिन टीस तो रह ही जाती है. आप फिर जीते नहीं उस रिश्ते को, केवल निभाते हैं और औचित्य सिद्ध करने में बाकि का जीवन निकाल देते हैं. कहते है न,केमिस्ट्री से ज्यादा Compatibility मायने रखती है. यही बातें जीवन को सुखमय बनती है अगर समयनुसार सोचा जाये तो. बाकि
              होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा॥ 
               अस कहि लगे जपन हरिनामा। गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा॥

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