Posts

Showing posts from December, 2014

मन की बात

कहूँगा अगर सुनोगे तो चीखूंगा गर अनसुना कर दोगे इस दायरे में बांध कर अदना महसूस करता हूँ दूसरो की सुन कर बंधुआ महसूस करता हूँ आशय जीवन का सुर हीन हो गया है व्यथित मन है आहत हूँ चाहता हमेशा हूँ किसी से व्यक्त करूँ पर इस व्यथा को पी लेता हूँ अपने आप पर क्रोधित हूँ पर निवारण से अनजान क्या सुनोगे मुझे तुम खुद को अनसुना करता हूँ मन की बात शायद इसी तरह रखता हूँ .